Gobar

जाने क्या अब समा गया सर में
खुद को बेघर समझ लिया घर में

आस’मान तक छुपा हुआ देखा
क्या क्या नही दिखा पता नही उस पल भर में

ना जाने किस किस ने हमे देखा उस छ्ण भर में
जब हम देर तक खड़े रहे उस गोबर में

©Asim, All rights reserved.

Digitally Protected Media.

MCN: WGAQM-C8DT9-AFRAW

Advertisements

© 2006 – 2017 A’s Creation (P) Limited | Shayari N Shayari® NETWORKS™, India

footprints

  • 133,210 SHAYARI LOVERS
%d bloggers like this: